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Friday, 30 September 2011

चने लोहे = दुखी-दोहे

पति-अनुनय  को कह धता, कुपित होय तत्काल |
बरछी-बोल  कटार-गम, दरक जाय मन-ढाल ||

पत्नी पग-पग पर परे,  पति पर न पतियाय |
श्रीमन का मन मन्मथा, श्रीमति मति मटियाय ||

हार गले की फांस है, किया विरह-आहार |
हारहूर  से  तेज  है,  हार   हूर  अभिसार ||
हारहूर=मद्य               आहार-विरह=रोटी के लाले
 
 चमकी चपला-चंचला , छींटा छेड़ छपाक |
 तेज तड़ित तन तोड़ती,  तददिन तमक तड़ाक |

मुमुक्षता मुँहबाय के, माया मोह मिटाय |
मृत्यु-लोक से जाय के, महबूबा चिल्लाय ||
 मुमुक्षता=मुक्ति की अभिलाषा का भाव 

पन-घट   पर का    घट-पना,  परकाकर   के   खूब |
घरजाया  -  घोटक  -  घटक,  डिंगल - डीतर  डूब ||
डिंगल=दूषित नीच अधम  
डीतर=पीछा करने वाला
परका=चस्का लगा
घरजाया=घर का दास
घोटक= घोड़ा
घटक=बिचौलिया, विवाह सम्बन्ध निश्चित कराने वाला |

Friday, 26 August 2011

बाबा रामदेव के अनशन पर हमला

            (पुरानी-रचना)

कोठर  में  सोई  गौरैया ,  
मार  झपट्टा  बाज  उठाये |
बिन प्रतिरोध सभी चूजों को , 
वो अपना आहार बनाए ||



पाण्डव  के  बच्चे  सोये  थे,  
अश्वस्थामा  महाकुकर्मी  |
गला रेत कर, बहुतै खुश हो, 
दुर्योधन को खबर सुनाये || 


उस भारत की दुखती घटना, 
नव-भारत फिर से दोहराए--
राम की लीला से घबरा कर, 
आत्मघात हित कदम उठाये ||


पागल सा भटकेगा शापित, 
जन्म से शोभित मणि छिनाये--
सदा  खून   माथे   से   बहता,  
अश्वस्थामा  नजर  चुराए  ||