Total Pageviews

Friday, 29 July 2011

कोई रिश्ता जब अपनी कीमत तय कर ले

ये   जिन्दगी  लगती  आसान  नहीं  प्यारे |
अपने  भी  अब  तो  मेहरबान  नहीं  प्यारे ||

अक्सरहां  वे बात  करते  हैं उसूलों  की--
टूटने  से  उनके,  परेशान  नहीं  प्यारे ||

राजी-ख़ुशी से गुर्दा,  हम निकाल कर दिए--
जिगर में किन्तु उनके, एहसान नहीं प्यारे ||

कमोवेश  एक  ही जैसा  हाल  है  कागा--
पर कोयल की चाल का निदान नहीं प्यारे ||

गुम-सुम सा आज, गांव का बरगद अपना-
पीपल पेड़  का बाकी   निशान  नहीं प्यारे  ||

कोई रिश्ता जब अपनी कीमत तय कर ले
मोल चुका देने में,  नुकसान  नहीं  प्यारे ||

4 comments:

  1. कमोवेश एक ही जैसा हाल है कागा--
    पर कोयल की चाल का निदान नहीं प्यारे ||
    waah

    ReplyDelete
  2. बहुत खूबी दिल से निकली सदा .

    ReplyDelete
  3. बेहतरीन ... बहुत अच्छी प्रस्तुति

    ReplyDelete
  4. आपकी पोस्ट की चर्चा सोमवार १/०८/११ को हिंदी ब्लॉगर वीकली {२} के मंच पर की गई है /आप आयें और अपने विचारों से हमें अवगत कराएँ / हमारी कामना है कि आप हिंदी की सेवा यूं ही करते रहें। कल सोमवार को
    ब्लॉगर्स मीट वीकली में आप सादर आमंत्रित हैं।

    ReplyDelete